छॊङ दिया किसी कॊ बैवजह तंग कऱना ।,,,जब कोइ अपना समजता हि नहि तो,,,, याद दिलाने से क्या फायदा,,,,,,,
मंगलवार, 20 अक्टूबर 2015
दिल की बातें
बात मोहब्बत की थी, तभी तो लूटा दी जिंदगी
तुझ पे..!!
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जिस्म से प्यार होता तो, तुझ से भी हसीन चेहरे
बिकते है,बाजार में..!
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सोमवार, 19 अक्टूबर 2015
Graduate Jamidar
Ae meri sarkar
Aarkshan da mara
Graduate jamidar
Krda takrar
Kheta wich b la camre
Kida ghulda bnda
Ki lenda pedawar
Fasi te latkya Jamidar
Gauuu da jaya b
Latki lash de kadam chumega
Shra wich crime disda
Anndata da Junun or pasina dikhega
Mnno anpadh di gll
Tbi to MAKE IN INDIA Or Ahmiyat
Anndata dikhegga
बुधवार, 5 अगस्त 2015
Mera desh
शनिवार, 27 जून 2015
र्दद
Akhia ch aa k ruk jande ne Hanju
Plka ch aa k muk
jande ne Hanju
Ji krda eena nu bha deya
Par ohnu hasdi nu wekh k
Sukh jande ne Hanju
बचपन
5-7 nu Mai aaya Jug ch
Mutthi Band krke
Takna c nzara jug da
Palka nu uper krke
Bachpan de School te dakhila le lya
Jigyasa nu mnlya Teacher
Baddi Jmat kiti pass
Berojgari sada muh tkegi nhi c aas
Yaar velli hoge vakh
Vadgi jimewari marde ha jakh
Rova yaad kar Bachpna da nzara
Eh hall sada Yaar Hmara.....
सोमवार, 22 जून 2015
यादें
मैं अक्सर रात में यूं ही सङक पर निकल आता हूँ ,
यह सोचकर कि
कहीं चांद को तन्हाई का अहसास न हो...!
बंद कर दिए हैं हमने तो
दरवाजे इश्क के,
पर कमबख़्त तेरी यादें तो
दरारों से ही चली आई
ये कहकर खुदा ने कर
दिया हर गुनाह से आजाद
मुझे ।
तू तो पहले से ही मोहब्बत
किये बैठा है, अब इससे
बडी कोई और सजा मेरे
पास नही ॥
शुक्रवार, 19 जून 2015
मेरे दोस्त (भाई) राहुल जागलान की कलम से।
Samay da marya
Haar likhda
Pyar da marya
Jajbat likhda
Mosam da marya
Kissan moat likhda
Docter sab nu
Bimar likhda
Afsar Sarkar da
Shikaar likhda
Likhan walya ki ki likhe
Rahul khud Berojgar
Likhda ee
बेटी का भाग्य.....!!
"भगवान क्या लिख रहे हो, इतनी देर से?"
देवदूत ने सृष्टि के निर्माता के कक्ष में आते हुवे कहा।
भगवान् ने उसकी तरफ ध्यान दिए बगैर लिखना चालू
रखा।
देवदूत ने कहा:- "सो जाइये भगवान् कई दिनों से आपने
तनिक भी विश्राम नहीं किया, क्या लिख
रहे है
आप?"
भगवान् :- "भाग्य"
देवदूत :- "किसका?"
भगवान :- "है एक गाव की लड़की,
अभी कुछ
ही महीनो में उसका जन्म होगा,
उसी का भाग्य
लिख रहा हुँ।"
देवदूत ने हंस कर कहा :- "गाव
की लड़की उसका क्या भाग्य?"
भगवान् ने क्रोधित होते हुवे कहा :- "ये आम
बेटी नहीं है,
इसका भाग्य मेने खुद लिखा है।"
देवदूत ने कहा :- "ऐसा क्या भाग्य है इसका?
भगवान् :- "ये लड़की बहुत पढेगी।"
देवदूत ने कटाक्ष में कहा :- "गांव में इसे कौन पढने देगा?"
भगवान् :- "ये खुद अपनी महेनत से
पढेगी और अपने गाव
का नाम रोशन करेगी।
अपने गांव की ये
एकलौती पढ़ी-
लिखी लड़की पुरे गाव
में क्रांति लाएगी, पुरे समाज को सुधारेगी।
देखना फिर उस गाव में कोई कम पढ़ा-लिखा न होगा।
देश में बड़े-बड़े लोग इसके इस कार्य से प्रभावित होंगे।
उसे उसके कार्य के लिए पुरस्कार दिया जायेगा।
वो अपने माँ-बाप का नाम रोशन करेगी, समझो ये
साक्षात लक्ष्मी होगी।
अपने माँ-बाप के सभी दुःख वो दूर करेगी।
एक झोपड़े से वो उन्हें महलों तक ले जायेगी।"
देवदूत ने कहा :- "पर क्या काम का,
लड़की तो पराया धन होती है.?
एक दिन ससुराल चली जायेगी, फिर?"
भगवान ने कहा :- "ना, ना ये
लड़की शादी के बाद
भी अपने माँ-बाप को संभालेगी।
अरे जिस दिन इसका भाई इसके माँ-बाप को घर से
निकालेगा उस दिन
यही बेटी उनका सहारा बनेगी।
उन्हें किसी बात का दुःख होने
नहीं देगी।"
अचानक भगवान बोलते-बोलते रुक गए।
उनकी छाती में पीड़ा होने
लगी।
देवदूत ने उन्हें संभाला और कहा:- "क्या हुवा भगवान?"
भगवान् की आँखों में आसू थे :-
"मेरी सारी मेहनत
पानी में गई देवदूत!"
देवदूत :- "क्या हुवा?"
भगवान :- "अब वो बेटी जन्म
नहीं लेगी"
देवदूत:- "क्यों भगवान्?"
भगवान :- "उसकी माँ ने उसे जन्म देने से पहले
ही मार
डाला"
देवदूत बुरी तरह चीखा :- "क्यों.........
..?
भगवान :- "सुनो.... उनकी आवाज... उन
दुष्टों की आवाज....वो कहते है उन्हें
बेटी नहीं बेटा चाहिए, बेटा चाहिए।
देवदूत ये लोग क्यों एसा करते है, क्यों बेटियों को जन्म
लेने से पहेले ही मार देते है....क्यों देवदूत क्यों?
देवदूत चुप-चाप भगवान के आँसुओ से कागज पे लिखे
बेटी के
भाग्य को बहता देख रहा था।
यादों का किस्सा
याद आते हैं.
मै गुजरे पल को सोचूँ
तो, कुछ दोस्त
बहुत याद आते हैं.
अब जाने कौन सी नगरी में,
आबाद हैं जाकर मुद्दत से.
मै देर रात तक जागूँ तो ,
कुछ दोस्त
बहुत याद आते हैं.
कुछ बातें थीं फूलों जैसी,
कुछ लहजे खुशबू जैसे थे,
मै शहर-ए-चमन में टहलूँ तो,
कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं.
सबकी जिंदगी बदल गयी
एक नए सिरे में ढल गयी
कोई बीवी के पीछे crazy हैं
किसी को दोस्तों की जरुरत नही
किसी की दो दो महबूबा हैं
तू से आप और तुम हो गये है
मै गुजरे पल को सोचूँ
तो, कुछ दोस्त
बहुत याद आते हैं.